वर्चस्व और संवैधानिक चेतना की यात्रा: होमबाउंड- गोविंद निषाद
25 फ़र., 2026

वर्चस्व और संवैधानिक चेतना की यात्रा: होमबाउंड- गोविंद निषाद

प्रेम और परिवार की पारंपरिक धारणाओं से लेकर जाति-विरोधी चेतना, स्त्री - मुक्ति, श्रमिक संघर्ष, किसा...

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छद्म स्थापनाओं को कटघरे में खड़ा करती ‘ह्यूमन्स इन द लूप’ -नीरा जलक्षत्रि
18 फ़र., 2026

छद्म स्थापनाओं को कटघरे में खड़ा करती ‘ह्यूमन्स इन द लूप’ -नीरा जलक्षत्रि

अरण्य सहाय द्वारा निर्देशित ‘ह्यूमन्स इन द लूप’ फिल्म अपने प्राकृतिक दृश्यों में सिनेमेटिक भाषा में...

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तीसरे अंक का स्थगित नायक  -राजेन्द्र यादव
5 फ़र., 2026

तीसरे अंक का स्थगित नायक -राजेन्द्र यादव

हमारे यहां जीवनियां या आत्मकथाएं क्यों नहीं लिखी जातीं, इस पर विचार करते हुए ‘हंस’ के किसी अंक में म...

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रास्ते मालूम नहीं होते, भटककर ढूंढ़ना होता है-(विनोद कुमार शुक्ल से असद जै़दी का संवाद)
6 जन., 2026

रास्ते मालूम नहीं होते, भटककर ढूंढ़ना होता है-(विनोद कुमार शुक्ल से असद जै़दी का संवाद)

असद ज़ैदी: मेरी पहली जिज्ञासा तो बहुत मामूली है. क्या आपकी वास्तविक जन्मतिथि सचमुच 1 जनवरी है? कागजों...

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शहर के नाम,  मृदुला गर्ग
15 दिस., 2025

शहर के नाम, मृदुला गर्ग

यह मेरा आखिरी खत है और मैं तय नहीं कर पा रही हूं कि इसे किसके नाम लिखूं. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. मुझे...

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नायक, खलनायक, विदूषक
11 नव., 2025

नायक, खलनायक, विदूषक

अमित यहां बैठे-बैठे भी अच्छी तरह जानता है कि भीतर के कमरे में पारुल इस समय खींच-खींचकर बाल झाड़ रही...

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