रास्ते मालूम नहीं होते, भटककर ढूंढ़ना होता है-(विनोद कुमार शुक्ल से असद जै़दी का संवाद)
6 जन., 2026

रास्ते मालूम नहीं होते, भटककर ढूंढ़ना होता है-(विनोद कुमार शुक्ल से असद जै़दी का संवाद)

असद ज़ैदी: मेरी पहली जिज्ञासा तो बहुत मामूली है. क्या आपकी वास्तविक जन्मतिथि सचमुच 1 जनवरी है? कागजों...

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शहर के नाम,  मृदुला गर्ग
15 दिस., 2025

शहर के नाम, मृदुला गर्ग

यह मेरा आखिरी खत है और मैं तय नहीं कर पा रही हूं कि इसे किसके नाम लिखूं. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. मुझे...

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नायक, खलनायक, विदूषक
11 नव., 2025

नायक, खलनायक, विदूषक

अमित यहां बैठे-बैठे भी अच्छी तरह जानता है कि भीतर के कमरे में पारुल इस समय खींच-खींचकर बाल झाड़ रही...

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आत्मकथा, यानी भीतर-बाहर झांकने की खिड़की
12 नव., 2025

आत्मकथा, यानी भीतर-बाहर झांकने की खिड़की

चाहें तो इसे संयोग कह लें कि साल का प्रारंभ और अंत दो आत्मकथाएं पढ़ते हुए ही हुआ। दोनों के प्रमुख पा...

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